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भारतीय नास्तिक के विषय में मौलाना शम्स नावेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह का कथन

 हमारे उस्ताद मौलाना #shams_naved_usmani rh.  साहब कहते थे कि भारत में कोई भी नास्तिक नहीं है। भारत का नास्तिक कम से कम एक ईश्वर से ज़रूर डरता है। उनकी इस बात की पुष्टि तब हुई जब मैंने नास्तिकों को अपने विवाह में पंडित जी के आदेश पर धर्म की सभी क्रियाएं करते हुए देखा। नास्तिकों को अपने बच्चों के विवाह धार्मिक रीति से करते देखा। भारतीय नास्तिक केवल वर्जनाएं तोड़ने के लिए नास्तिकता का ढोंग करते हैं।

मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह किस बात को सैकड़ों बार रिपीट करते थे?

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रब से ताल्लुक़ की वजहें हर ग्रुप की वजह अलग है। लोगों को फ़ूड, मकान, शादी और ख़ुशी की ज़रूरत है। ऐसे में लोग अपनी ज़रूरतों के लिए रब से दुआ माँगते हैं। एक ग्रुप के लोगों का रब से ताल्लुक़ दुनिया की ज़रूरतों की वजह से है। एक ग्रुप को हमेशा की ज़िंदगी और जन्नत की राहतें चाहिएं। ये लोग हमेशा के मज़े के लिए रब से जुड़ते हैं। कुछ लोग ने अपनी ज़िंदगी में बहुत गुनाह किए हैं। उन्हें दुनिया और आख़िरत में सज़ा का डर है। वे रब से माफ़ी और बख़्शिश के लिए जुड़ते हैं। इन तीनों ज़रूरतों के लिए रब ने लोगों को तौबा और दुआ के लिए कहा है और इसे पसंद किया है। लेकिन कुछ लोगों को अल्लाह की ख़ूबियाँ पसंद हैं और वे अल्लाह से उसकी ख़ूबियों की वजह‌ से #मुहब्बत करते हैं। वे ज़मीनो आसमान देखते हैं तो अल्लाह की सन्नाई, तख़्लीक़ और इब्दाअ़ (कारीगरी, क्रिएशन और inventions) देखते हैं। कायनात में अद्ल (बैलेंस) और हर काम में माअ़नवियत (सार्थकता) देखते हैं। वे उसका सुरक्षित शब्द #क़ुरआने_मजीद पढ़ते हैं तो वे उसके शब्दों के मिरेकल्स देखते हैं, उसके मीनिंग के मिरेकल्स देखते हैं कि क्या बात कही, कितनी ख़ूबसूरती से कह...

अरणी मंथन के बारे में मौलाना से क्या ग़लती हुई?

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ईरानी कल्चर में बुज़ुर्ग के, अपने उस्ताद के अदब में यह बात भी सिखाई जाती है कि आप अपने बुज़ुर्ग की या अपने उस्ताद की ग़लती को ग़लती नहीं कह सकते। वही बात भारत में मदरसों और सूफ़ियों की ख़ानक़ाहों में रिवाज पा गई। जिसकी वजह से उस्ताद से कोई ग़लती न जानते हुए हो गई तो फिर उनके शागिर्दों ने उसकी इस्लाह न की बल्कि वे अदब की वजह से उसे दोहराते रहे बल्कि उसे सही साबित करते रहे कि उस्ताद की ग़लती असल में ग़लती न थी। इससे भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिमों के अक़ीदे ख़राब हुए और वे झूठी उम्मीदों में जीने लगे। ऐसा इल्मी ग़लती की इस्लाह करने को बेअदबी में शुमार करने की वजह से हुआ। जबकि यह बात न सहाबा में थी और न इस्लाम में है। यह बात न कालिजों में है और न ही वैज्ञानिकों में। आज अपने उस्ताद की ग़लती को ग़लत बता दो तो शायद लोग इसे अच्छा न समझें लेकिन उस्ताद की ग़लती को बताना तब दीनी तौर वाजिब है, जब उसका ताल्लुक़ दीनी अक़ीदे की हिफ़ाज़त से है। #अरणी_मंथन इसे कहते हैं। जो आप वीडियो में देख रहे हैं। इसका वर्णन वेदों में आया है। मौलाना को पता नहीं था कि प्राचीन काल में पुरोहित यज्ञ करने के लिए अग्नि कैस...

मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह में नर्मी का मिज़ाज और एडजस्टमेंट बहुत था। -DR. ANWER JAMAL

✍🏻 मैंने जवानी में क़दम रखा ही था कि मुझे तफ़्हीमुल क़ुरआन मिल गई। मैंने उसकी सारी मोटी मोटी जिल्दें पढ़ दीं। मैंने उसमें पढ़ा कि 'जो अल्लाह के उतारे हुए हुक्म के मुताबिक फैसला न करें वही काफ़िर, ज़ालिम और फ़ासिक़ हैं।' देखें पवित्र क़ुरआन 5:45-47 मैंने चारों तरफ़ देखा तो लोग अपनी रस्मो रिवाज और अपनी आदत और अपनी अटकल के मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी में फ़ैसले कर रहे थे, बस एक मैं ही था, जो मैं अपने फ़ैसले अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ कर रहा था। मैंने अपने चारों तरफ़ ज़ालिमों, फ़ासिक़ों और काफ़िरों की भरमार देखी।  अब इन सब लोगों पर वे आयतें आसानी से फ़िट हो जाती हैं, जिनमें इन्हें दुनिया में ज़लील होने और मरने के बाद जहन्नम में जाने की पेशगी ख़बर दी गई है। इसके बाद मैंने इन्हें ज़िल्लत और आग से बचाने के लिए इस्लाह शुरू कर दी लेकिन उससे कुछ ज़्यादा फ़र्क़ न पड़ा। लोग जैसे थे, वैसे ही रहे। मेरे नज़रिए में हर आदमी आग की तरफ़ जा रहा था। बड़े बड़े आलिम और यहाँ तक कि मेरे घर वाले भी आग की तरफ़ जाते हुए दिखे। जिससे मैं इतना डर गया कि मुझे डिप्रेशन हो गया। लोग जैसे थे, वैसे ही रहे। मैं बीमार ह...

ख़्वाब में मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह को ख़ुश देखना

आज मैंने ख़्वाब में मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह को देखा और उनसे बात की। वह आसमानी कुर्ता और सफ़ेदपाजामा पहने हुए थे और ख़ुश थे। मैंने सादा और पुराना सा सफ़ेद कुर्ता पाजामा और उस पर स्वेटर पहन रखा था। जैसे कि अक्तूबर नवंबर में पहनते हैं। बस मैं और मौलाना ही थे और तीसरा कोई न था। मैंने उनसे बातें कीं। उनकी बातों में एक मैसेज हो सकता है। इसी ख़्वाब में मैंने ख़ुद को रामपुर में देखा। तारिक़ साहब मुझसे मिले। वह मुझे आया हुआ देखकर बहुत ख़ुश हुए। वह एक बड़े कमरे में स्टूल पर चढ़कर छत में कुछ काम कर रहे थे। जैसे कि घर में पेंट होता है तो लोग क़ीमती बल्ब वग़ैरह उतारते हैं। उन्होंने उसी स्टूल पर खड़े खड़े किसी को सलाह दी कि आजकल पेंट से जुड़ी चीज़ सस्ती मिल रही है, उसे ख़रीदकर रख लो और कुछ वक़्त बाद जब क़ीमत बढ़े तो उसे बेच दो। मैं रामपुर के दोस्तों से मिला। वे भी ख़ुश हुए। उनके पीछे एक इमारत में जुमा की नमाज़ होनी थी। मैं वहां नमाज़ पढ़ने गया तो देखा कि मा शा अल्लाह इमारत नमाजियों भरी हुई है। मैंने अपने दोस्त इब्राहीम को रामपुर में देखा। जो बुलंदशहर से उनसे मिलने आए थे। मैंने इब्र...

हिंदुओं के सरदार और लीडर इस्लाम के तौर-तरीकों और कानूनों को अपना तरीक़ा और कानून बना लेंगे -Maulana Shams Naved Usmani

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मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह की नज़र बहुत  बारीक थी। मौलाना किसी बात में वह पहलू भी तलाश लेते थे, जिसे सब देख नहीं सकते थे। मिसाल के तौर पर वह हजरत शाह वलीउल्लाह रहमतुल्लाहि अलैह की इस भविष्यवाणी को बार-बार दोहराया करते थे: 'और जिस बात का मुझे यक़ीन है वह यह कि अगर मस्लन हिंदुओं का हिंदुस्तान के मुल्क पर तसल्लुत मोहकम और हर पहलू से हो जब भी अल्लाह की रू से यह वाजिब और ज़रूरी है कि हिंदुओं के सरदारों और लीडरों के दिल में इल्हाम करे कि वो दीने इस्लाम को अपना मज़हब बना लें।' -अगर अब भी ना जाकर तो और दो पृष्ठ संख्या 28 आमतौर से जब कोई आलिम या दानिश्वर हज़रत शाह साहब की यह भविष्यवाणी पड़ता है तो वह यह नतीजा निकालता है कि शाह साहब यह कह रहे हैं कि जब हिंदुस्तान पर हिंदुओं का क़ब्ज़ा पूरी तरह मज़बूत हो जाएगा तब वे अपना धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बन जाएंगे और वे मुस्लिमों की तरह कलिमा, रोज़ा, नमाज़, ज़कात और हज अदा करने लगेंगे। एक दिन मौलाना ने मुझे इस भविष्यवाणी के एक ऐसे पहलू के बारे में बताया, जिसकी तरफ़ इन्सान का दिमाग़ नहीं जाता। मौलाना ने फरमाया कि शाह ...

شمس نوید عثمانی رحمتہ اللہ علیہ

گیان کی بات پریم سے کہو یعنی علمی بات محبت سے کہو۔ یہ مولانا شمس نوید عثمانی رحمۃ اللہ علیہ کی ایک ایسی تعلیم تھی جسے وہ ہمارے سامنے بار بار اور بہت زیادہ دوہراتے تھے۔ میں نے محترم جناب سید عبد اللہ طارق صاحب کے حکم پر آپ کے لئے مولانا کے بارے میں یہ خاص  مضمون لکھنا شروع کیا تو میں نے چاہا کہ میں شروع میں ہی ان کی ایک ایسی تعلیم پیش کردوں کہ اگر آپ یہ مضمون پورا نہ پڑھیں اور ان کی صرف ایک تعلیم پر بھی عمل کرلیں تو آپ کی زندگی پوری طرح بدل جائے۔ کسی عظیم بزرگ کی زندگی کے بارے میں جاننے کا مقصد یہی ہوتا ہے کہ ان کی تعلیم کے نور سے ہماری زندگی روشن ہوجائے۔ آپ سے میری یہ التجا ہے کہ اگر آپ واقعی مولانا شمس نوید عثمانی رحمۃ اللہ علیہ کے نظریہ کو جاننا چاہتے ہیں اور ان کی خوبیوں کو پہچاننا چاہتے ہیں تو آپ صرف ایک دن آج کے دن گیان کی بات پریم سے کہیں۔ آپ کسی بلند شخصیت کو تب ہی سمجھ سکتے ہیں جب آپ بھی  شعور کی اسی سطح پر جینے لگیں جس میں وہ جیتے تھے۔  آپ کے پاس صرف ایک دن، آج کا دن ہے۔ آپ کے پاس صرف ایک پل، 'اب کاپل' ہے جس میں آپ سانس لے رہے ہیں۔ آپ اس ایک ...